जबलपुर। सिहोरा-खितौला को जोड़ने वाला करोड़ों की लागत से तैयार फ्लाईओवर बिना किसी औपचारिक उद्घाटन के अचानक आम जनता के लिए खोल दिया गया, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आमतौर पर इस तरह की बड़ी परियोजनाओं का लोकार्पण जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में किया जाता है, लेकिन यहां न कोई रिबन कटा, न कोई समारोह हुआ—बस बैरिकेड हटे और वाहन दौड़ने लगे।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका था, लेकिन उद्घाटन की तारीख तय नहीं हो पा रही थी। बताया जा रहा है कि स्थानीय नेताओं के बीच श्रेय लेने की होड़ के कारण मामला अटका हुआ था। इसी बीच बढ़ते ट्रैफिक दबाव और जनता की मांग को देखते हुए इसे बिना किसी औपचारिक घोषणा के चालू कर दिया गया, जिससे “मूक उद्घाटन” जैसी स्थिति बन गई।

हालांकि, इस फैसले ने सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा को लेकर खड़ा कर दिया है। बिना अंतिम तकनीकी निरीक्षण और आधिकारिक हैंडओवर की सार्वजनिक पुष्टि के किसी भी फ्लाईओवर को शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है। यदि किसी प्रकार की तकनीकी खामी सामने आती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—यह अभी स्पष्ट नहीं है। प्रशासनिक अधिकारी इस पूरे मामले पर खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं और इसे केवल “जनता की सुविधा के लिए लिया गया निर्णय” बता रहे हैं।

दूसरी ओर, स्थानीय लोगों को ट्रैफिक जाम से राहत जरूर मिली है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस कदम को लेकर बहस छिड़ गई है। कई नागरिकों का कहना है कि यदि पुल पूरी तरह तैयार था, तो इसे पहले ही खोल देना चाहिए था, और यदि कोई कमी थी तो बिना उद्घाटन के इसे चालू करना लापरवाही है।

राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला गर्मा गया है। विपक्ष ने इसे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए विफलता करार दिया है, जबकि सत्ता पक्ष इसे जनता के हित में लिया गया निर्णय बता रहा है। फिलहाल, बिना शिलापट्ट और औपचारिक उद्घाटन के शुरू हुआ यह फ्लाईओवर सिहोरा के इतिहास में एक अनोखा उदाहरण बन गया है, जहां जनता को सुविधा तो मिली, लेकिन सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं।