संकट में सारथी बनी सरकार : कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का मिशन राहत, बोले-हर पीड़ित तक पहुंचेगी त्वरित मदद
जयपुर। प्रकृति के बदलते मिजाज और बेमौसम ओलावृष्टि ने जहाँ अन्नदाता के अरमानों पर पानी फेर दिया है, वहीं राजधानी के शहरी और ग्रामीण इलाकों में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस चुनौतीपूर्ण समय में राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ एक सजग सेनापति की भांति मोर्चे पर डटे नजर आ रहे हैं। झोटवाड़ा क्षेत्र में भारी बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान का जायजा लेते हुए उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि आपदा की इस घड़ी में किसी भी प्रभावित को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।
राठौड़ ने केवल तात्कालिक सहायता तक सीमित न रहकर दीर्घकालिक विकास पर जोर दिया है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि आगामी मानसून और संभावित अंधड़ को देखते हुए बिजली के बुनियादी ढांचे को अभेद्य बनाया जाए। गिरे हुए बिजली के पोल और झूलते तारों को दुरुस्त करने के साथ-साथ भविष्य के लिए ऐसी इंजीनियरिंग और प्लानिंग करने के आदेश दिए हैं, जिससे भविष्य में जान-माल का नुकसान न्यूनतम हो सके। यह विजन दर्शाता है कि सरकार केवल गड्ढे भरने में नहीं, बल्कि रास्तों को मजबूत बनाने में विश्वास रखती है।मंत्री के कड़े निर्देशों के बाद झोटवाड़ा क्षेत्र के प्रशासनिक अमले में भारी सक्रियता देखी जा रही है। राजस्व विभाग की टीमें खेतों में पहुंचकर फसलों के खराबे का शीघ्र आकलन कर रही हैं, ताकि मुआवजे की प्रक्रिया बिना किसी रेड टेप (लालफीताशाही) के तुरंत शुरू की जा सके। कर्नल राठौड़ ने स्पष्ट कहा है कि रिपोर्ट तैयार करने में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी, क्योंकि पीड़ित किसान और नागरिक के लिए समय पर मिली राहत ही वास्तविक न्याय है।कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का व्यवहारात्मक दृष्टिकोण जनता के प्रति संवेदनशीलता और जवाबदेही को उजागर करता है।

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