निचली अदालत का फैसला रद्द, उच्च न्यायालय ने दी राहत
जयपुर। महानगर प्रथम की एडीजे-9 कोर्ट ने 12 साल पुराने रास्ता जाम मामले में कांग्रेस के दो विधायकों समेत 9 लोगों को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया है। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर सभी आरोपियों को दोषमुक्त घोषित किया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रेमरतन ओझा ने गुरुवार को लाडनूं विधायक मुकेश भाकर, शाहपुरा विधायक मनीष यादव और झोटवाड़ा से कांग्रेस प्रत्याशी रहे अभिषेक चौधरी सहित अन्य आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया।
यह मामला 13 अगस्त 2014 का है, जब आरोपियों पर राजस्थान यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट के बाहर जेएलएन मार्ग को करीब 20 मिनट तक जाम करने का आरोप था। इस मामले में एसीजेएम-19 कोर्ट ने करीब 10 महीने पहले सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए एक-एक साल की सजा सुनाई थी। आरोपियों की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता जितेंद्र भाकर ने दलील दी कि निचली अदालत ने बिना ठोस साक्ष्यों के सजा सुनाई। उन्होंने बताया कि ट्रायल के दौरान जांच अधिकारी (आईओ) के बयान तक दर्ज नहीं किए गए और केवल तीन पुलिसकर्मियों के बयानों के आधार पर फैसला दिया गया, जो विधिसम्मत नहीं है। मामले में पुलिस ने 11 अगस्त 2016 को चालान पेश किया था। ट्रायल के दौरान मुकेश भाकर, मनीष यादव, अभिषेक चौधरी, राजेश मीणा, रवि किराड़, वसीम खान, द्रोण यादव, भानुप्रताप सिंह और विद्याधर मील को दोषी ठहराया गया था, लेकिन अब एडीजे कोर्ट ने सभी को राहत दे दी है।

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