जल निगम की 4 बड़ी परियोजनाएं, 1307 गांवों को मिलेगा पानी
जबलपुर जिला पंचायत की बरगी डैम में जल संवाद बैठक संपन्न
जबलपुर। जिला पंचायत जबलपुर की सामान्य सभा की बैठक हाल ही में बरगी डैम में आयोजित की गई। 'जल संवाद: नीर से नीतियों तक' के नाम से संपन्न हुई इस बैठक में जल प्रबंधन और मत्स्य पालन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई। यह बैठक सामान्य आयोजनों से भिन्न रही क्योंकि इसका आयोजन म.प्र. टूरिज्म के क्रूज पर किया गया था। इस दौरान जल निगम और मत्स्य पालन विभाग से जुड़े दो प्रमुख एजेंडा बिंदुओं पर विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक के पश्चात समिति के सदस्यों ने निर्माणाधीन परियोजनाओं का मौके पर निरीक्षण भी किया ताकि कार्यों की गुणवत्ता और गति का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सके। जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गेहलोत ने सदस्यों को प्रोजेक्ट की जानकारी दी।
जल निगम की परियोजनाओं का निरीक्षण
बैठक के दौरान जल निगम के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। इसके तुरंत बाद समिति के सदस्यों ने क्रूज के माध्यम से निर्माणाधीन इंटेक वैल का मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। इस दौरान जल निगम के महाप्रबंधक ने कार्य की तकनीकी बारीकियों और प्रगति के बारे में सदस्यों को अवगत कराया। सदस्यों ने निर्देशित किया कि निर्माण कार्य को निर्धारित समय सीमा में और उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जल्द से जल्द नर्मदा जल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही बरगी डैम में स्थापित केज कल्चर का भी निरीक्षण किया गया, जिसकी जानकारी मत्स्य विभाग के सहायक संचालक द्वारा दी गई।
चार परियोजनाओं से पेयजल आपूर्ति
म.प्र. जल निगम मर्यादित परियोजना क्रियान्वयन इकाई जबलपुर के अंतर्गत चार बड़ी परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी और मंडला जिलों में निरंतर जल प्रदाय सुनिश्चित करना है। विशेष रूप से जबलपुर जिले के कुल 1307 गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए योजनाएं तैयार की गई हैं। इसमें जबलपुर समूह जल प्रदाय योजना के तहत पाटन, शहपुरा, मझोली, सिहोरा और पनागर विकासखंड के 848 ग्राम शामिल हैं। इसी तरह पायली समूह जल प्रदाय योजना के माध्यम से जबलपुर और शहपुरा के 186 ग्राम, छीताखुदरी योजना से जबलपुर विकासखंड के 194 ग्राम और पडवार-पडरिया योजना से 79 ग्राम लाभान्वित होंगे। वर्तमान में पायली योजना द्वारा 50 गांवों में कमिशनिंग का कार्य प्रगति पर है।
मध्य प्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति 2026 और केज कल्चर
मत्स्य पालन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाने के लिए मध्य प्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति 2026 के क्रियान्वयन पर बल दिया गया है। इसके तहत निजी निवेशकों और लाभार्थियों के माध्यम से केज लगाकर मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। निजी क्षेत्र के उद्यमियों के लिए पहले आओ पहले पाओ की नीति अपनाई गई है, जबकि सामान्य लाभार्थियों का चयन लॉटरी पद्धति से जिला स्तरीय समिति द्वारा किया जाएगा। इच्छुक आवेदक मत्स्य पालन और केज निर्माण के लिए अपने आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके साथ ही विभागीय योजनाओं जैसे किसान क्रेडिट कार्ड, एन एफ डी पी पंजीयन और जल कृषि बीमा के संबंध में विस्तृत जानकारी कार्यालय सहायक संचालक मत्स्योद्योग जबलपुर से प्राप्त की जा सकती है।

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