दक्षिण का खाटू धाम: जहां बाबा श्याम करते हैं हर मुराद पूरी
राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम जी का धाम दुनिया भर में प्रसिद्ध है। लेकिन दक्षिण भारत में बसे राजस्थानी समाज के लिए हैदराबाद के काचीगुड़ा स्थित श्री श्याम मंदिर किसी वरदान से कम नहीं है। श्री कांची कामकोटि पीठम् के मार्गदर्शन में संचालित यह मंदिर अपनी स्थापना के 30 गौरवमयी वर्ष पूरे कर चुका है और आज इसे 'दक्षिण का खाटू धाम' कहा जाता है।
प्रवासी राजस्थानियों की आस्था का केंद्र
काचीगुड़ा के व्यस्त क्षेत्र में स्थित यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि प्रवासी राजस्थानियों की संस्कृति और अटूट विश्वास का प्रतीक है। मंदिर के कपाट खुलते ही 'जय श्री श्याम' के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो जाता है। तीन दशकों के सफर में यहाँ न केवल भक्तों की संख्या बढ़ी है, बल्कि बाबा के प्रति लोगों का समर्पण भी और गहरा हुआ है।
दक्षिण में खाटू जैसी अलौकिक अनुभूति
श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि यहाँ दर्शन करने से ठीक वैसी ही शांति और दिव्य अनुभूति होती है, जैसी राजस्थान के मूल खाटू धाम में। बाबा श्याम का मनमोहक श्रृंगार और उनकी जीवंत प्रतिमा भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है। फाल्गुन मेले और अन्य त्योहारों पर यहाँ खाटू की तर्ज पर ही भव्य आयोजन, श्याम कीर्तन और छप्पन भोग लगाए जाते हैं, जो अब दक्षिण भारत के बड़े उत्सवों में शुमार हो चुके हैं।
संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का संगम
यह मंदिर नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बन गया है। बीते 30 वर्षों में इस स्थान ने उन हज़ारों प्रवासियों को संबल दिया है, जो राजस्थान से दूर रहकर भी अपने आराध्य के सानिध्य में सुकून तलाशते हैं।
'हारे का सहारा' बाबा श्याम
मंदिर के सेवादारों के अनुसार, यहाँ आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। श्रद्धालुओं का कहना है कि वे अपनी परेशानियां लेकर बाबा के दरबार में आते हैं और माथा टेकते ही उन्हें मानसिक शांति मिलती है। 'हारे का सहारा' कहे जाने वाले बाबा श्याम की कृपा से ही यह मंदिर आज दक्षिण भारत की भक्ति परंपरा का एक अभिन्न अंग बन चुका है।

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