सड़क हादसों में जयपुर देश में दूसरे नंबर पर, बेलगाम वाहन बने बड़ी वजह
जयपुर: राजस्थान की राजधानी में इन दिनों बेलगाम रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है, जहाँ तेज गति से दौड़ते वाहन मासूम जिंदगियों के लिए काल साबित हो रहे हैं। हाल ही में मानसरोवर और हवामहल जैसे प्रमुख क्षेत्रों में हुई हिट एंड रन की हृदयविदारक घटनाओं ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़कों पर रील बनाने का शौक और लापरवाही से वाहन चलाने की प्रवृत्ति न केवल राहगीरों के लिए घातक सिद्ध हो रही है, बल्कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट में भी जयपुर को मौतों के मामले में देश का दूसरा सबसे खतरनाक शहर बताया गया है।
सड़कों पर बढ़ती खूनी रफ़्तार और भयावह हादसे
जयपुर के विभिन्न इलाकों से सामने आ रही दुर्घटनाओं की तस्वीरें रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं, जहाँ पिछले कुछ दिनों में कई लोग अकाल मृत्यु का ग्रास बन चुके हैं। मानसरोवर क्षेत्र में एक काली थार द्वारा स्कूटी सवार महिला को कुचलकर दूर तक घसीटने की घटना हो या हवामहल के सामने रील बना रहे छात्रों पर जानबूझकर कार चढ़ाने का प्रयास, ये मामले दर्शाते हैं कि सड़कों पर अनुशासन का अभाव है। इसी वर्ष फुटपाथ पर सो रहे लोगों को कुचलने वाली ऑडी कार की घटना अभी लोग भूले भी नहीं थे कि तेज रफ्तार के कारण हो रहे इन नए हादसों ने जनता के बीच डर और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।
एनसीआरबी की रिपोर्ट में जयपुर की चिंताजनक स्थिति
देश के बड़े शहरों में यातायात दुर्घटनाओं के विश्लेषण पर आधारित नवीनतम रिपोर्ट के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं, जो जयपुर को दिल्ली के बाद दूसरे सबसे असुरक्षित शहर के रूप में रेखांकित करते हैं। वर्ष 2024 के दौरान देशभर के 53 बड़े शहरों में हज़ारों लोगों ने सड़क हादसों में अपनी जान गंवाई, जिनमें जयपुर में हुई मौतों का आंकड़ा एक हज़ार के पार पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुल दुर्घटनाओं में से 97 प्रतिशत मामले सीधे तौर पर सड़क हादसों से जुड़े हैं, जो यह स्पष्ट करते हैं कि शहरी बुनियादी ढांचे और यातायात नियमों के पालन में कहीं न कहीं बड़ी चूक हो रही है।
ओवरस्पीडिंग और लापरवाही बनी मौतों की प्रमुख वजह
सांख्यिकीय विश्लेषण से यह तथ्य उभरकर सामने आया है कि सड़क पर होने वाली अधिकांश मौतों का इकलौता सबसे बड़ा कारण निर्धारित सीमा से अधिक तेज रफ्तार से वाहन चलाना है। कुल मौतों में से आधी से ज्यादा मौतें केवल ओवरस्पीडिंग की वजह से हुई हैं, जबकि लापरवाही से ओवरटेकिंग और नशे की हालत में ड्राइविंग ने भी कई परिवारों को उजाड़ दिया है। विशेष रूप से रिहायशी इलाकों, स्कूलों और मनोरंजन केंद्रों के पास बढ़ते हादसों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पैदल चलने वाले लोग सबसे अधिक जोखिम में हैं, वहीं नेशनल हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाएं भी शहर की मृत्यु दर में बड़ा हिस्सा साझा कर रही हैं।

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