बड़ी लापरवाही का मामला, विभागों में SOP की कमी उजागर
कोटा। शहर के राजकीय अस्पताल में प्रसूताओं की मृत्यु और स्वास्थ्य बिगड़ने की हृदयविदारक घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए दो चिकित्सकों और दो नर्सिंग अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह दंडात्मक कार्रवाई जयपुर से आई विशेषज्ञ टीम की विस्तृत जांच रिपोर्ट और उनके द्वारा सौंपी गई सिफारिशों के आधार पर की गई है। ड्रग एंड फूड सेफ्टी कमिश्नर डॉ. टी सुमंगला के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय डॉक्टर्स की टीम ने अस्पताल में हुए प्रत्येक केस का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया, जिसके बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने इस लापरवाही पर मुहर लगाई है।
विशेषज्ञ टीम की जांच में लापरवाही के बड़े खुलासे
जयपुर से आई उच्चस्तरीय टीम ने दो दिनों तक चले अपने सघन निरीक्षण के दौरान पाया कि प्रसूताओं के ऑपरेशन और उपचार के दौरान ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों की तरफ से भारी चूक हुई थी। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि न केवल सर्जरी के समय बल्कि ऑपरेशन के बाद दी जाने वाली 'पोस्ट ऑपरेटिव केयर' में भी नर्सिंग स्टाफ द्वारा गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसने मरीजों की स्थिति को और अधिक नाजुक बना दिया।
अस्पताल प्रबंधन और मानक प्रक्रियाओं का अभाव
जांच के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया कि अस्पताल के विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में इलाज के लिए आवश्यक 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' यानी एसओपी का पालन ही नहीं किया जा रहा था। प्रमुख शासन सचिव ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि मरीजों के इलाज और शल्य चिकित्सा के समय जो चेकलिस्ट अनिवार्य रूप से भरी जानी चाहिए थी, उसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया, जो चिकित्सा सेवाओं के स्तर पर एक अक्षम्य चूक है।
रात्रि कालीन चिकित्सा व्यवस्था और निरीक्षण की खामियां
अस्पताल के बुनियादी ढांचे और कार्यप्रणाली में एक और बड़ी कमजोरी यह उजागर हुई है कि रात के समय अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सकों की उपस्थिति न के बराबर रहती है। फीडबैक के आधार पर शासन सचिव ने माना कि रात्रि ड्यूटी के दौरान पीजी डॉक्टर्स और सीनियर रेजिडेंट्स की संख्या भी अपर्याप्त होती है, जिससे आपातकालीन स्थितियों को संभालना मुश्किल हो जाता है। इसी प्रशासनिक विफलता और कमजोर सुपरविजन को देखते हुए अब न्यू मेडिकल हॉस्पिटल और जेके लोन अस्पताल के अधीक्षकों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
निलंबन की कार्रवाई और चिकित्सा जगत में उपजा आक्रोश
सरकार द्वारा देर रात की गई इस कड़ी कार्रवाई ने जहां प्रशासन की सख्ती को दर्शाया है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सा कर्मियों में इसे लेकर भारी रोष व्याप्त हो गया है। निलंबन के आदेश जारी होने के बाद गायनी विभाग के कई वरिष्ठ चिकित्सक और रेजिडेंट डॉक्टर्स अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल के निवास पर एकत्रित हुए। निलंबित किए गए डॉ. बीएल पाटीदार और डॉ. खुशबू मीणा सहित अन्य सहयोगी चिकित्सकों ने इस पूरी प्रक्रिया पर असंतोष जाहिर करते हुए सरकार के फैसले का विरोध किया है।

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