रहस्यमय तरीके से लापता हुआ गोडावण का चूजा, संरक्षण परियोजना पर सवाल
संकट में राजस्थान का गौरव: सुरक्षा घेरे के बावजूद कच्छ से गायब हुआ गोडावण का चूजा
नई दिल्ली/कच्छ: रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की शान और राजस्थान के राज्य पक्षी 'गोडावण' (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के संरक्षण को लेकर चल रहे प्रयासों को एक बड़ा झटका लगा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में इस दुर्लभ पक्षी को बचाने की मुहिम की तारीफ की थी, लेकिन इसी बीच गुजरात के कच्छ से आई एक दुखद खबर ने वन्यजीव प्रेमियों को चिंता में डाल दिया है।
जैसलमेर से कच्छ: एक ऐतिहासिक वैज्ञानिक प्रयोग
गोडावण की विलुप्त होती प्रजाति को बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक साहसिक कदम उठाया था। राजस्थान के जैसलमेर (सम) स्थित ब्रीडिंग सेंटर से एक उपजाऊ अंडा लेकर करीब 770 किलोमीटर दूर गुजरात के कच्छ (नलिया क्षेत्र) पहुँचाया गया। 21 मार्च 2026 को शुरू हुआ यह सफर 19 घंटे में पूरा हुआ। इस अंडे को वहां एक जंगली मादा गोडावण के घोंसले में रखा गया था, जिसे 'जंपस्टार्ट' तकनीक कहा जाता है।
सफलता के बाद छाई मायूसी
26 मार्च 2026 को जब उस अंडे से नन्हा चूजा बाहर आया, तो इसे संरक्षण की दुनिया में एक बड़ी जीत माना गया। चूंकि कच्छ में अब एक भी नर गोडावण नहीं बचा है, इसलिए इस चूजे से आबादी बढ़ने की नई उम्मीद जगी थी।
50 गार्ड्स और वॉच टावर, फिर भी चूजा लापता
इस नन्हे पक्षी की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। 50 से ज्यादा कर्मियों की टीम, वॉच टावर और दूरबीन के जरिए 24 घंटे निगरानी रखी जा रही थी। पूरे इलाके को सील कर दिया गया था। इसके बावजूद, 18 अप्रैल के बाद से चूजा अचानक अपनी मां के साथ दिखना बंद हो गया।
क्या हुआ नन्हे मेहमान के साथ?
हालांकि वन विभाग ने अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि सुरक्षा में सेंध लगाकर कोई जंगली जानवर उसे अपना शिकार बना ले गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि गोडावण के बच्चों की मृत्यु दर वैसे भी अधिक होती है, लेकिन इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच यह घटना होना जांच का विषय है।
अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा गोडावण
दुनियाभर में अब 150 से भी कम गोडावण बचे हैं। हाईटेंशन बिजली की तारें, शिकार और प्राकृतिक दुश्मन इनके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बने हुए हैं। कच्छ की इस घटना ने संरक्षण के मौजूदा तरीकों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यह चूजा महज एक पक्षी नहीं, बल्कि इस प्रजाति को बचाने की एक बड़ी उम्मीद था, जो अब टूटती नजर आ रही है।

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